
ये बात उस समय की है जब श्री कृष्ण अपने मित्रो के साथ गायो को भोजन करा रहे थे तभी ब्रह्मदेव वहां आए और उन्होंने देखा कि श्री कृष्ण अपने मित्रो के साथ खेल रहे है । उन्होंने ने उनकी गायो को गायब कर दिया , यह देख कृष्ण के मित्र घबरा गए, ये देख कर श्री कृष्ण ने कहा ” हो सकता कि हमारी गायो को कहीं हरी–हरी घास दिख गई होगी तो वो उन्हें खाने चली गई होंगी “, कृष्ण से यह बात सुनते ही उनके मित्र निश्चिंत हो गए। यह सब देख ब्रह्मदेव सोचने लगे की इन बच्चो को तो कोई फर्क ही नहीं पड़ा और उन्होंने कृष्ण के मित्रों को भी गायब कर के ब्रम्हलोक ले गए । अब कृष्ण सबकुछ समझ गए थे वो जानते थे कि ये ब्रह्मदेव का ही काम है । भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं ही उन बच्चो और गायो का रूप ले लिया । जब ब्रम्हादेव उन बच्चो को ब्रमहालोक छोड़ने के बाद वापस से पृथ्वी पर आए तो पूरे एक साल बीत चुके थे क्योंकि ब्रमहालोक का मात्र एक पल पृथ्वी के पूरे एक साल के बराबर होता है। ब्रम्हदेव सोचने लगे कि ये कैसे हो सकता है क्योंकि जिन बच्चो को अभी ब्रमहालोक ले गए थे वो तो यहां आराम से खेल रहे है, ब्रमहादेव अब परेशान होने लगे थे , उनकी ये दशा देख श्री कृष्ण को उन पर दया आ गई और उन्होंने इस भ्रम से पर्दा उठाया और बताया की मैंने ही उन बच्चो और गायो का रूप धरा है ।

ब्रम्हादेव को अपनी की हुई भूल पर पछतावा हुआ और उन्होंने उन बच्चों और गायों को वापस से पृथ्वी ला दिया । जो बच्चे पूरे एक साल से गायब थे उन्हे तो कुछ पता ही नही था, ब्रम्हालोक जाने से पृथ्वी पे आने तक की सारी घटना इनके लिए मात्र पलक झपकाने जितनी थी । लेकिन इन्हें पता भी नहीं चला कि ये एक साल से धरती पे थे ही नहीं ।
यहां जानने वाली बात ये है कि ब्रमहालोक और पृथ्वी के समय में बहुत अंतर था और Albert Einstein के थियोरी के अनुसार पूरे ब्राम्हण में समय एक समान नहीं होता बल्कि हर जगह अलग अलग होता है । जैसा कि हमने अभी देखा की ब्रमहालोक और पृथ्वी का समय भी अलग–अलग था।
Albert Einstein न तो ये theory 19th century में दी थी जबकि Bhagwat Geeta में यही बात 5070 साल पहले ही लिख दी गई थी जिसे विज्ञान आज डिस्कवर कर रहा है ।
कम से कम अब तो हमें अपने Bhagwat Puran पर गर्व होना ही चाहिए ।
— जय हिन्द—